fbpx

नमस्कार भारतवासियो,

कैसे है आप सब लोग?? खबरें पढ़ी है, की हमारी इस दुनिया में एक विषाणु(virus) ने काफ़ी तहलका मचाया हुआ है। काफ़ी समय से तेज़ रफ्तार से दौड़ती आप सबकी ज़िन्दगी में एक ठहराव-सा आ गया है। पर आप सबकी समझ और अक्ल पे मुझे और मेरे पुरे समुदाय को भरोसा है। हम जानते है की आप कोई ना कोई समाधान तो खोज ही लेंगे। बस यही आशा करते है की समाधान धारणीय(sustainable) हो। 

अब आप सोच रहे होंगे की मै कौन हूँ ?? 

अरे तो, थोड़ा सब्र करे और आगे पढ़े खुद जान जाएंगे।

वैसे एक संकेत दे देता हूँ मै आपके देश का राष्टीय जानवर हूँ। अभी भी नहीं पता चला तो घबराइए मत आगे पढ़ने पे जान जाएंगे।  

बॉलीवुड के अंदाज़ में शुरू करू तो “टाइगर ज़िंदा है”। ये बस अंदाज़ बॉलीवुड वाला है बाकि बात यहाँपे बॉलीवुड के टाइगर की नहीं “असली टाइगरस” यानकी हमारे “बाघ” समुदाय की हो रही है। 

हमने भी एक लम्बा सफ़र तय किया है, एक वक़्त तो ऐसा आ गया की लगा था अब हर जगह बस “एक था टाइगर” लिखा जाने वाला है पर शुक्र है की बहुत देर होने से पहले आपको एहसास हो गया और आपने हमारी जनसंख्या  को बचाने और बढ़ाने का निर्णेय ले लिया। और इस कड़ी का एक अहम निर्णय लिया गया 29 जुलाई 2010 में ।  तब हमारी जनसंख्या थी सिर्फ 1706।  

जी हाँ, सही पढ़ा आपने सिर्फ 1706 यह गिनती देखने के बाद मेरे मन में एक ही सवाल उठता है “हम थे भी या थे ही नहीं , जनाब चूतस्पा हो गया हमारे साथ, चूतस्पा समझते है आप लोग।  बहुत समय पहले जब रजवाड़े हुआ करते थे राजा-महाराजा-शहंशाहो-अंग्रेज़ो इन सब की हुक़ुमते थी इस भारत की सर-जमी पे तब तब शिकार को बड़ी बहादुरी का प्रतिक माना जाता था , यह हुक्मरान हम जैसे बेख़ौफ़ जानवरो को छुपके से मारना अपनी शान समझते थे। यह शान थी या इनका अहम या इस संसार के दूसरे जीवो के प्रति निर्दयता, इसका फैसला मै आप सब पाठको पे छोड़ता हूँ।  पर इनके इस व्यवहार के कारण 1875 -1925  के बीच सिर्फ हिन्दुस्तान की सर-जमी पे लगभग हमारे 80000 साथी मारे गए।  हमारे शिकार,अंगो की तस्करी और खालो के इस्तेमाल का यह घिनोना खेल आज़ादी के बाद भी चलता रहा , और पहली बार सरकार की नज़र 1972 में खुली जब एक सर्वे के मुताबिक भारत में सिर्फ 1827 बाघ ही बचे थे।  तब कमिटियां बनी और “Wildlife Protection act ” संविधान का हिस्सा बना। पर ऐसे तो कितने ही act बनते है और बस किताबो में पड़े रहते है यह तो हम जानवरो से अच्छा आप इंसान जानते होंगे…खेर, इस act में 1986  में कुछ जरुरी फेरबदल हुए, कुछ और फेरबदल 1991 में भी हुए। पर कुछ ख़ास नतीजे निकल के नहीं आये।।  इसलिए 2010 में  Saint Petersburg Tiger Summit , रूस में कुछ देशो ने मिलकर लक्ष्य रखा की 2022  तक हमारी जनसंख्या दोगुनी करनी है जो की एक सर्वे के मुताबिक 2018 में ही हासिल कर ली गयी और इसकी आधिकारिक पुष्टि आपके मतलब हाँ मतलब हमारे प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट के जरिये की  ‘The story that started with Ek Tha Tiger and then continued with Tiger Zinda Hai, should not stop there. It should be baaghon mein bahaar hai’. चलिए ये हमारे लिए भी और आप सबके लिए भी ख़ुशी की बात है और इंसानो… ऐसा कम ही होता है ना, की सरकार कोई वादा करे और वो समय पे नहीं समय से पहले ही पूरा हो जाए।  बधाईया आपको भी, हमको भी, तत्कालीन और समकालीन सरकारों को (देखे हमारा बाघ समुदाय अपना  राजनीतक पक्ष एक दम साफ़ रखता  है, काम दोनों सरकारों ने किया तो बधाईया भी दोनों को )  पर बात अभी खत्म नहीं हुई है ‘अभी तो बस चले ही है सफ़र काफ़ी बाकि है।‘ तो वक़्त है हम जानवरो को बाहरी समझ के मत खत्म करो हम भी इस ecosystem का अहम हिस्सा है। ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांत से रहो , आपके लिए भी अच्छा है और हमारे लिए भी। इन्ही बातो के साथ मै अपने इस monologue को विराम देता हूँ। पढ़ने के लिए शुक्रिया। “ 

चलिए अब मै चलता हूँ पर आप लोग “International Tiger Day” मनाये थोड़ी जागरूकता हमारे बारे में अपने भाई बंधुओं में फैलाये।  

आपका अपना,
रियल टाइगर,
रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान, राजस्थान 

P.S- “पधारो म्हारे देश” & देखो पर दूर से

— kyakarogeyjaankar


This article is a part of our new vernacular series, where we publish work by talented authors and poets in diverse local and indigenous languages. You can browse all our vernacular articles here: https://moodymo.co.in/category/vernacular/

Don’t forget to follow MoodyMo on Facebook or Instagram for lots more interesting stuff on people, places, brands, unheard voices and unsung heroes every week!


No Comments Yet

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Subscribe Now